शिक्षा के मंदिर में शराब का नशा! स्कूल में बोतल, बच्चों के सामने लड़खड़ाता शिक्षक और दो साल तक सोता रहा सिस्टम

बच्चों का दावा- "सर रोज शराब पीकर आते हैं, कभी हमारे ऊपर गिर जाते हैं"; सहायक शिक्षक का बड़ा खुलासा- "24 दिन में मुश्किल से 2-3 दिन आते हैं स्कूल", उपस्थिति और वेतन पर भी उठे गंभीर सवाल
Raju Gupta (state head)

Raju Gupta (state head)

Sidhi | Updated: 07 Aug 2026, 08:58 AM IST | 1 min read
शिक्षा के मंदिर में शराब का नशा! स्कूल में बोतल, बच्चों के सामने लड़खड़ाता शिक्षक और दो साल तक सोता रहा सिस्टम
Share:

EXCLUSIVE | शिक्षा के मंदिर में शराब का नशा! स्कूल में बोतल, बच्चों के सामने लड़खड़ाता शिक्षक और दो साल तक सोता रहा सिस्टम

News E7 Live ग्राउंड रिपोर्ट | बच्चों का दावा- "सर रोज शराब पीकर आते हैं, कभी हमारे ऊपर गिर जाते हैं"; सहायक शिक्षक का बड़ा खुलासा- "24 दिन में मुश्किल से 2-3 दिन आते हैं स्कूल", उपस्थिति और वेतन पर भी उठे गंभीर सवाल

सीधी। शिक्षा को समाज की सबसे मजबूत नींव माना जाता है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य शिक्षकों के हाथों में होता है। लेकिन यदि वही शिक्षक शराब के नशे में स्कूल पहुंचने लगें, बच्चों के सामने लड़खड़ाएं, कक्षा में ही सो जाएं और वर्षों तक शिकायतों के बावजूद उन पर कार्रवाई न हो, तो यह केवल एक शिक्षक की लापरवाही नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की नाकामी बन जाती है।

सीधी जिले के सिहावल जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम डिहुली नंबर-4 स्थित प्राथमिक विद्यालय से सामने आया मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां पदस्थ शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल पर विद्यालय परिसर में शराब की बोतल लाने, नशे की हालत में बच्चों को पढ़ाने, नियमित रूप से अनुपस्थित रहने, स्कूल में सोने और अभद्र व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह मामला किसी एक दिन का नहीं है। विद्यालय के सहायक शिक्षक, ग्रामीणों और संकुल स्तर के अधिकारियों का कहना है कि पिछले करीब दो वर्षों से लगातार शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

जब इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो News E7 Live की टीम गुरुवार को मौके पर पहुंची और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आए तथ्य न सिर्फ चौंकाने वाले हैं बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की हकीकत भी उजागर करते हैं।

वायरल वीडियो से खुली पोल

गुरुवार को गांव निवासी गयासुद्दीन अंसारी किसी काम से विद्यालय पहुंचे थे। उनका आरोप है कि उन्होंने शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल को स्कूल परिसर में शराब की बोतल के साथ देखा। उन्होंने शिक्षक को ऐसा करने से रोका और पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया।

कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद गांव में चर्चा शुरू हो गई और मामला पूरे जिले में फैल गया।

इसके बाद News E7 Live की टीम ने विद्यालय पहुंचकर बच्चों, शिक्षकों, ग्रामीणों और जिम्मेदार अधिकारियों से बातचीत कर पूरे मामले की तह तक जाने का प्रयास किया।

ग्राउंड रिपोर्ट : स्कूल के कमरे में लेटे मिले शिक्षक

जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थ हैं—दिनेश प्रसाद कोल और अशोक कुमार शर्मा।

जब News E7 Live की टीम विद्यालय पहुंची तो दिनेश प्रसाद कोल स्कूल के एक कमरे में लेटे हुए मिले। टीम ने उन्हें आवाज लगाई तो वे लड़खड़ाते हुए उठे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने शराब नहीं पी है, बल्कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया है इसलिए वे आराम कर रहे थे।

कुछ देर बाद वे बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्लैकबोर्ड के पास पहुंचे। इसी दौरान उन्होंने जिला कलेक्टर विकास मिश्रा के स्थान पर "मनीष मिश्रा" लिख दिया। यह दृश्य मौके पर मौजूद लोगों ने भी देखा।

बच्चों का दर्द : "सर रोज शराब पीकर आते हैं"

विद्यालय में पढ़ने वाले कई बच्चों ने बताया कि संबंधित शिक्षक अक्सर शराब पीकर स्कूल आते हैं।

बच्चों ने कहा कि कई बार शिक्षक कक्षा में ही गिर जाते हैं। कभी बच्चों के ऊपर गिर पड़ते हैं तो कभी उल्टी करने लगते हैं। ऐसे में पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है।

कुछ बच्चों ने यह भी बताया कि शिक्षक के डर और उनके व्यवहार के कारण कई छात्र स्कूल आने से भी घबराने लगे हैं।

यदि बच्चों के ये आरोप सही हैं तो यह मामला केवल अनुशासन का नहीं बल्कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक वातावरण से भी जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।

सहायक शिक्षक ने खोले दो साल पुराने राज

विद्यालय में पदस्थ दूसरे शिक्षक अशोक कुमार शर्मा ने भी कई गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने बताया कि पिछले लगभग दो वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार संबंधित शिक्षक अधिकांश दिनों में शराब के नशे में विद्यालय आते हैं।

उन्होंने दावा किया कि महीने में लगभग 24 दिन स्कूल खुलता है, लेकिन दिनेश प्रसाद कोल मुश्किल से दो या तीन दिन ही विद्यालय पहुंचते हैं। जब भी आते हैं तो नशे की हालत में रहते हैं, बच्चों को पढ़ाने के बजाय गाली-गलौज करते हैं और कई बार स्कूल में ही सो जाते हैं।

अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने कई बार संकुल प्राचार्य, बीआरसी कार्यालय और विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी। उपस्थिति रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराए, लेकिन किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक उपस्थिति बेहद कम होने के बावजूद संबंधित शिक्षक को नियमित रूप से पूरा वेतन मिलता रहा।

"मेरे छुट्टी पर जाते ही स्कूल बंद हो जाता है"

अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि विद्यालय की पूरी जिम्मेदारी लगभग अकेले उन्हीं पर आ गई है।

यदि उन्हें विभागीय प्रशिक्षण, बैठक या किसी अन्य कारण से अवकाश लेना पड़ता है तो विद्यालय बंद करने जैसी स्थिति बन जाती है क्योंकि दूसरे शिक्षक या तो विद्यालय नहीं आते या फिर नशे की हालत में रहते हैं।

उन्होंने बताया कि एक समय विद्यालय में लगभग 200 विद्यार्थी पढ़ते थे, लेकिन अब संख्या घटकर केवल 28 रह गई है। उनके अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण विद्यालय की खराब छवि और लगातार बिगड़ती शिक्षण व्यवस्था है।

संकुल प्राचार्य ने भी मानी शिकायतें

संकुल प्राचार्य सुरेश प्रसाद कोल ने स्वीकार किया कि उन्होंने वायरल वीडियो देखा है।

उन्होंने कहा कि संबंधित शिक्षक को कई बार मौखिक रूप से समझाया गया, लेकिन उनके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से इस प्रकार की शिकायतें मिलती रही हैं।

संकुल प्राचार्य ने विभागीय निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी नियमित निरीक्षण करते तो शायद यह स्थिति नहीं बनती।

शिक्षक का दावा- "डॉक्टर ने शराब पीने की सलाह दी"

जब News E7 Live ने शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने शराब पीने की बात स्वीकार की, लेकिन इसके पीछे एक अलग तर्क दिया।

उन्होंने कहा कि उन्हें ब्लड प्रेशर की बीमारी है और सतना के एक डॉक्टर ने शराब पीने की सलाह दी है ताकि वे सामान्य रूप से काम कर सकें।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे शराब की बोतल स्कूल लेकर आते हैं। हालांकि उनका कहना था कि वे हमेशा स्कूल में शराब नहीं पीते।

हालांकि उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और सामान्य चिकित्सा सलाह में शराब को ब्लड प्रेशर के उपचार के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता।

उपस्थिति और वेतन भुगतान पर भी सवाल

मामले में एसीएस दिवाकर प्रसाद शुक्ला ने बताया कि उन्हें संकुल प्राचार्य की ओर से भेजी गई उपस्थिति के आधार पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि संबंधित शिक्षक पिछले महीने केवल चार दिन विद्यालय पहुंचे थे, जबकि उपस्थिति 24 दिन की भेजी गई थी।

यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो यह केवल शिक्षक की लापरवाही नहीं बल्कि विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितता का मामला भी बन सकता है।

200 से घटकर 28 रह गए विद्यार्थी

विद्यालय में छात्रों की संख्या लगातार कम होना भी पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब विद्यालय में पढ़ाई नहीं होगी, शिक्षक नियमित नहीं आएंगे और बच्चों के सामने शराब पीने जैसी घटनाएं होंगी तो अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से भरोसा उठना स्वाभाविक है।

कई परिवारों ने अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजना शुरू कर दिया है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार मजबूरी में सरकारी विद्यालय पर निर्भर हैं।

सवाल सिर्फ एक शिक्षक का नहीं, पूरी व्यवस्था का

डिहुली नंबर-4 का यह मामला केवल एक शिक्षक की कार्यशैली तक सीमित नहीं है।

यदि शिकायतें दो वर्षों से हो रही थीं, संकुल स्तर तक जानकारी थी, ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे थे और फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह शिक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

यह भी जांच का विषय है कि यदि संबंधित शिक्षक विद्यालय नहीं आते थे तो उपस्थिति किस आधार पर दर्ज होती रही और पूरा वेतन किस प्रक्रिया के तहत जारी होता रहा।

अब जांच और कार्रवाई का इंतजार

वीडियो वायरल होने और News E7 Live की ग्राउंड रिपोर्ट सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच की बात कही है।

यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के साथ-साथ उपस्थिति, वेतन भुगतान और निरीक्षण व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य किसी भी व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में अब पूरा जिला इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या इस बार कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहेगी या वास्तव में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या शिक्षा विभाग इस बार बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की सुर्खियां बनकर फाइलों में दब जाएगा?

Live Updates

Loading live updates...
Waiting for the first update...

Comments (0)