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शिक्षा के मंदिर में शराब का नशा! स्कूल में बोतल, बच्चों के सामने लड़खड़ाता शिक्षक और दो साल तक सोता रहा सिस्टम

बच्चों का दावा- "सर रोज शराब पीकर आते हैं, कभी हमारे ऊपर गिर जाते हैं"; सहायक शिक्षक का बड़ा खुलासा- "24 दिन में मुश्किल से 2-3 दिन आते हैं स्कूल", उपस्थिति और वेतन पर भी उठे गंभीर सवाल

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EXCLUSIVE | शिक्षा के मंदिर में शराब का नशा! स्कूल में बोतल, बच्चों के सामने लड़खड़ाता शिक्षक और दो साल तक सोता रहा सिस्टम

News E7 Live ग्राउंड रिपोर्ट | बच्चों का दावा- "सर रोज शराब पीकर आते हैं, कभी हमारे ऊपर गिर जाते हैं"; सहायक शिक्षक का बड़ा खुलासा- "24 दिन में मुश्किल से 2-3 दिन आते हैं स्कूल", उपस्थिति और वेतन पर भी उठे गंभीर सवाल

सीधी। शिक्षा को समाज की सबसे मजबूत नींव माना जाता है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य शिक्षकों के हाथों में होता है। लेकिन यदि वही शिक्षक शराब के नशे में स्कूल पहुंचने लगें, बच्चों के सामने लड़खड़ाएं, कक्षा में ही सो जाएं और वर्षों तक शिकायतों के बावजूद उन पर कार्रवाई न हो, तो यह केवल एक शिक्षक की लापरवाही नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की नाकामी बन जाती है।

सीधी जिले के सिहावल जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम डिहुली नंबर-4 स्थित प्राथमिक विद्यालय से सामने आया मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां पदस्थ शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल पर विद्यालय परिसर में शराब की बोतल लाने, नशे की हालत में बच्चों को पढ़ाने, नियमित रूप से अनुपस्थित रहने, स्कूल में सोने और अभद्र व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह मामला किसी एक दिन का नहीं है। विद्यालय के सहायक शिक्षक, ग्रामीणों और संकुल स्तर के अधिकारियों का कहना है कि पिछले करीब दो वर्षों से लगातार शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

जब इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो News E7 Live की टीम गुरुवार को मौके पर पहुंची और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आए तथ्य न सिर्फ चौंकाने वाले हैं बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की हकीकत भी उजागर करते हैं।

वायरल वीडियो से खुली पोल

गुरुवार को गांव निवासी गयासुद्दीन अंसारी किसी काम से विद्यालय पहुंचे थे। उनका आरोप है कि उन्होंने शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल को स्कूल परिसर में शराब की बोतल के साथ देखा। उन्होंने शिक्षक को ऐसा करने से रोका और पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया।

कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद गांव में चर्चा शुरू हो गई और मामला पूरे जिले में फैल गया।

इसके बाद News E7 Live की टीम ने विद्यालय पहुंचकर बच्चों, शिक्षकों, ग्रामीणों और जिम्मेदार अधिकारियों से बातचीत कर पूरे मामले की तह तक जाने का प्रयास किया।

ग्राउंड रिपोर्ट : स्कूल के कमरे में लेटे मिले शिक्षक

जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थ हैं—दिनेश प्रसाद कोल और अशोक कुमार शर्मा।

जब News E7 Live की टीम विद्यालय पहुंची तो दिनेश प्रसाद कोल स्कूल के एक कमरे में लेटे हुए मिले। टीम ने उन्हें आवाज लगाई तो वे लड़खड़ाते हुए उठे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने शराब नहीं पी है, बल्कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया है इसलिए वे आराम कर रहे थे।

कुछ देर बाद वे बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्लैकबोर्ड के पास पहुंचे। इसी दौरान उन्होंने जिला कलेक्टर विकास मिश्रा के स्थान पर "मनीष मिश्रा" लिख दिया। यह दृश्य मौके पर मौजूद लोगों ने भी देखा।

बच्चों का दर्द : "सर रोज शराब पीकर आते हैं"

विद्यालय में पढ़ने वाले कई बच्चों ने बताया कि संबंधित शिक्षक अक्सर शराब पीकर स्कूल आते हैं।

बच्चों ने कहा कि कई बार शिक्षक कक्षा में ही गिर जाते हैं। कभी बच्चों के ऊपर गिर पड़ते हैं तो कभी उल्टी करने लगते हैं। ऐसे में पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है।

कुछ बच्चों ने यह भी बताया कि शिक्षक के डर और उनके व्यवहार के कारण कई छात्र स्कूल आने से भी घबराने लगे हैं।

यदि बच्चों के ये आरोप सही हैं तो यह मामला केवल अनुशासन का नहीं बल्कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक वातावरण से भी जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।

सहायक शिक्षक ने खोले दो साल पुराने राज

विद्यालय में पदस्थ दूसरे शिक्षक अशोक कुमार शर्मा ने भी कई गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने बताया कि पिछले लगभग दो वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार संबंधित शिक्षक अधिकांश दिनों में शराब के नशे में विद्यालय आते हैं।

उन्होंने दावा किया कि महीने में लगभग 24 दिन स्कूल खुलता है, लेकिन दिनेश प्रसाद कोल मुश्किल से दो या तीन दिन ही विद्यालय पहुंचते हैं। जब भी आते हैं तो नशे की हालत में रहते हैं, बच्चों को पढ़ाने के बजाय गाली-गलौज करते हैं और कई बार स्कूल में ही सो जाते हैं।

अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने कई बार संकुल प्राचार्य, बीआरसी कार्यालय और विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी। उपस्थिति रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराए, लेकिन किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक उपस्थिति बेहद कम होने के बावजूद संबंधित शिक्षक को नियमित रूप से पूरा वेतन मिलता रहा।

"मेरे छुट्टी पर जाते ही स्कूल बंद हो जाता है"

अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि विद्यालय की पूरी जिम्मेदारी लगभग अकेले उन्हीं पर आ गई है।

यदि उन्हें विभागीय प्रशिक्षण, बैठक या किसी अन्य कारण से अवकाश लेना पड़ता है तो विद्यालय बंद करने जैसी स्थिति बन जाती है क्योंकि दूसरे शिक्षक या तो विद्यालय नही...

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