उमरिया जिले के शाहपुर गांव की रहने वाली 21 वर्षीय शुभांगी मिश्रा ने अपनी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई मिसाल पेश की है। डॉक्टर बनने का सपना पूरा नहीं होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। आज उनका चयन मध्यप्रदेश पुलिस सहित कई सरकारी सेवाओं में हो चुका है।
शुभांगी के पिता श्याम कुमार मिश्रा पुलिस महानिरीक्षक शहडोल जोन कार्यालय में हेड कांस्टेबल हैं, जबकि उनकी माता सुनीता मिश्रा गृहिणी हैं। उन्होंने शहडोल के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने दो वर्षों तक नीट परीक्षा की तैयारी की। पहले प्रयास में उन्हें करीब 400 अंक मिले, जबकि दूसरे प्रयास में 570 अंक हासिल किए। अच्छे अंक आने के बावजूद उन्हें एमबीबीएस में प्रवेश नहीं मिल सका।
इस असफलता के बाद उन्होंने अपना लक्ष्य बदलते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। प्रतिदिन 8 से 10 घंटे अध्ययन और लगातार मेहनत का परिणाम यह रहा कि सबसे पहले उनका चयन मध्यप्रदेश पुलिस कांस्टेबल के पद पर हुआ। जब वे जबलपुर में प्रशिक्षण ले रही थीं, उसी दौरान उनका चयन एसएससी स्टेनोग्राफर, मध्यप्रदेश पुलिस उप निरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक (स्टेनो) और उप निरीक्षक (सूबेदार) सहित कई पदों पर भी हो गया।
शुभांगी का कहना है कि असफलता जीवन का अंत नहीं होती। यदि किसी लक्ष्य में सफलता नहीं मिलती तो नए अवसरों की ओर बढ़ना चाहिए। उनका सपना अब सिविल सेवा में चयनित होकर देश की सेवा करना है, जिसके लिए वे आज भी नियमित रूप से 8 से 10 घंटे पढ़ाई कर रही हैं।
वे अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और परिवार के सहयोग को देती हैं। उनके पिता श्याम कुमार मिश्रा बताते हैं कि शुभांगी शुरू से ही अनुशासित रही हैं और उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा।
ग्रामीण परिवेश से निकलकर शुभांगी मिश्रा ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर हर मुश्किल को सफलता में बदला जा सकता है। उनकी उपलब्धि आज उमरिया जिले की बेटियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
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