"जब बेटियों ने कहा,अंतिम संस्कार कर दीजिए, हम नहीं आ पाएंगे — एक पिता की आखिरी विदाई ने सबको रुला दिया"
भारत देश के सोनीपत हरियाणा से यह खबर है।ज़िंदगी भर जिन हाथों ने बेटियों को संभाला, उनकी उंगली पकड़कर चलना सिखाया, आखिर में वही पिता अपनी अंतिम यात्रा पर बेटियों का इंतज़ार करते रह गए।
वही हरियाणा के सोनीपत से सामने आई यह घटना हर किसी को भावुक कर देने वाली है। शिवचरण गुप्ता नामक बुजुर्ग का निधन एक वृद्धाश्रम में हो गया। आश्रम प्रबंधन ने तुरंत उनकी दोनों बेटियों को सूचना दी, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वे अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं पहुंच सकीं। बताया जा रहा है कि दोनों बेटियां पेशे से शिक्षिका हैं और उन्होंने किसी कारणवश आने में असमर्थता जताई।
इस आश्रम के अनुसार, बेटियों ने पिता के अंतिम संस्कार के लिए ₹5,100 ऑनलाइन भेजे और अनुरोध किया कि सभी धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाए। जहा इसके बाद आश्रम के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर एक बेटे का फर्ज निभाया और पूरे सम्मान के साथ बुजुर्ग को अंतिम विदाई दी।
वही यह भी कहा जाता है कि अंतिम दर्शन हर संतान का सबसे बड़ा कर्तव्य होता है। जहा इस मामले में बेटियों को वीडियो कॉल के माध्यम से अपने पिता के अंतिम दर्शन कराए गए। फोटो की स्क्रीन के उस पार बेटियां थीं और इस पार पिता की अंतिम यात्रा... यह दृश्य वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर गया।
जहा यह घटना अब केवल एक परिवार की कहानी नहीं रही, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़ी है। क्या सच मे यह परिस्थितियों की मजबूरी थी या फिर बदलते दौर में रिश्तों के बीच बढ़ती दूरियां? वही इस पर लोगों की राय अलग-अलग है, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने हर संवेदनशील इंसान को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
Comments (0)