दतिया उपचुनाव के बाद गरमाई MP की सियासत, फिर चर्चा में कमलनाथ की सियासी सक्रियता

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में नजर आ रहे हैं। भले ही वे कांग्रेस के सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहले की तुलना में कम दिखाई दे रहे हों
Raju Gupta (state head)

Raju Gupta (state head)

Bhopal | Updated: 09 Aug 2026, 04:19 PM IST | 1 min read
दतिया उपचुनाव के बाद गरमाई MP की सियासत, फिर चर्चा में कमलनाथ की सियासी सक्रियता
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दतिया उपचुनाव के बाद गरमाई MP की सियासत, फिर चर्चा में कमलनाथ की सियासी सक्रियता

मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में नजर आ रहे हैं। भले ही वे कांग्रेस के सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहले की तुलना में कम दिखाई दे रहे हों, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए उनकी राजनीतिक सक्रियता लगातार बनी हुई है।

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर कमलनाथ ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान आदिवासी समुदाय के लिए किए गए कार्यों और शुरू की गई योजनाओं का जिक्र करते हुए मौजूदा बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय के हितों के साथ न्याय नहीं हो रहा है और अब लोगों को कांग्रेस सरकार के दौर की याद आने लगी है।

कमलनाथ ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री मदद योजना, वन मित्र पोर्टल, वन अधिकार दावों की पुनः समीक्षा और तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाने जैसे फैसलों को प्रमुखता से सामने रखा। उनके मुताबिक, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आदिवासी हितों को प्राथमिकता दी गई और उनके अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

वहीं, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज को शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने आदिवासी समुदाय के अधिकार, सम्मान और विकास के लिए संघर्ष जारी रखने की बात दोहराई।

दतिया उपचुनाव के नतीजे के बाद कांग्रेस के भीतर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता और कमलनाथ के लगातार सामने आ रहे बयानों ने मध्य प्रदेश की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। अब सवाल यही है कि क्या कमलनाथ की यह सक्रियता आने वाले दिनों में कांग्रेस की रणनीति को नई दिशा देगी, या फिर यह सिर्फ राजनीतिक संदेश तक सीमित रहेगी?

फिलहाल, इतना तय है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी मुकाबला लगातार तेज हो रहा है और आदिवासी वोट बैंक को लेकर दोनों दलों की राजनीतिक सक्रियता आने वाले समय में और बढ़ सकती है।

 

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