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📅 Date: 07/08/2026
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स्कूल ड्रेस में खेत में धान रोपते दिखे छात्र, वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल

उमरिया के करकेली विकासखंड के ग्राम देवरी मजरा स्थित सरस्वती स्कूल के बच्चों का स्कूल ड्रेस में खेत में धान रोपते हुए वीडियो वायरल हुआ है। मामले में प्राचार्य सुरेंद्र सिंह ने इसे कृषि संबंधी प्रोजेक्ट गतिविधि बताते हुए बच्चों से वास्तविक खेती का काम कराने से इनकार किया है।

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By Reporter

 जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत ग्राम देवरी मजरा स्थित सरस्वती स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म पहने कई छात्र खेत में धान की रोपाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर बच्चे पढ़ाई के समय खेत में क्या कर रहे थे। मामले ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों से कराए जा रहे कार्यों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

वायरल वीडियो में साफ दिखाई देता है कि छात्र-छात्राएं स्कूल ड्रेस पहने हुए पानी से भरे खेत में उतरकर धान की पौध लगाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर साझा होने के बाद लोगों ने इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे बच्चों से खेत में काम कराने का मामला बताया, जबकि कुछ ने इसे व्यावहारिक शिक्षा से जोड़कर देखा।

मामले को लेकर जब विद्यालय के प्राचार्य सुरेंद्र सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि बच्चों से खेत में मजदूरी या कृषि कार्य नहीं कराया गया। उनके अनुसार यह केवल शैक्षणिक गतिविधि का हिस्सा था।

प्राचार्य ने बताया कि विद्यालय के समीप स्थित खेत को छात्रों को कृषि संबंधी जानकारी देने के उद्देश्य से दिखाया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक प्रोजेक्ट आधारित गतिविधि थी, जिसके तहत बच्चों को धान की रोपाई की प्रक्रिया समझाई जा रही थी। उनका यह भी कहना है कि संबंधित खेत विद्यालय परिसर से सटा हुआ है और शैक्षणिक गतिविधि के तहत ही छात्र वहां गए थे।

हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि यदि यह केवल शैक्षणिक प्रदर्शन था तो बच्चों का खेत में उतरकर धान लगाना कितना आवश्यक था। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रायोगिक शिक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन ऐसी गतिविधियों में छात्रों की सुरक्षा, अभिभावकों की सहमति और स्पष्ट शैक्षणिक उद्देश्य का ध्यान रखा जाना चाहिए।

फिलहाल इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि विभाग इस वायरल वीडियो की जांच करता है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि गतिविधि पूरी तरह शैक्षणिक थी या फिर बच्चों से वास्तविक कृषि कार्य कराया गया।

वायरल वीडियो ने एक बार फिर स्कूलों में कराई जाने वाली प्रायोगिक गतिविधियों की सीमाओं और उनकी निगरानी पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की संभावित जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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