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अब गोबर बनेगा किसानों की नई कमाई का सबसे बड़ा जरिया?
केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में 'गोबरधन' (GOBARdhan) बायोगैस योजना को मंजूरी दे दी गई है।
इस योजना का मकसद सिर्फ गोबर का बेहतर उपयोग करना नहीं, बल्कि गोबर को आय, ऊर्जा और जैविक खेती का मजबूत आधार बनाना है।
सरकार किसानों और पशुपालकों को गोबर से बायोगैस और जैविक खाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। सबसे खास बात यह है कि सरकार इस बायोगैस की खरीद भी करेगी और बायोगैस प्लांट लगाने के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराएगी।
इस पहल से एक ओर जहां गांवों में स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार होगा, वहीं दूसरी ओर रसोई गैस पर निर्भरता कम होगी। बायोगैस उत्पादन के बाद बचने वाली स्लरी जैविक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल होगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर खर्च घटेगा और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ेगी।
सरकार की योजना है कि इस अभियान को देशभर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। इससे न केवल किसानों और पशुपालकों की आय के नए स्रोत खुलेंगे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अगर यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले समय में गोबर सिर्फ अपशिष्ट नहीं, बल्कि किसानों की अतिरिक्त कमाई का मजबूत माध्यम बन सकता है।